किस्से तेरी नज़र ने,
सुनाये ना फिर कभी,
हमने भी दिल के दाग,
दिखाये ना फिर कभी.
ऐ याद-ए-दोस्त आज तू,
जी भर के दिल दूखा,
शायद ये रात हिज्र की,
आये ना फिर कभी.
वो मासूमियत दिल में,
मेरे रहेगी सदा, हाय!!
वापस लौटकर के यह दोस्त,
पाये ना फिर कभी.
मेरी आरज़ू विसाल-ए-दोस्त,
ना किसी हाल निबाई तूने,
तमन्ना-ए- दोस्ती "पाशा",
जागे ना फिर कभी.