जब प्यार नहीं है तो,
भुला क्यु नहीं देते,
ख़त किस लिए रखे है,
जला क्यु नहीं देते.
किस वास्ते लिखा है,
हथेली पे मेरा नाम,
मै हर्फ़-ए-गलत हू तो,
मिटा क्यु नहीं देते.
लिलाह शबो रोज़ की,
उलझन से निकालो,
तुम मेरे नहीं हो तो,
बता क्यु नहीं देते.
रह रह के न तड़पाओ,
ऐ बेदर्द मसीहा,
हाथो से मुझे जहर,
पीला क्यु नहीं देते.
जब इसकी वफ़ाओ पे,
यकी तुमको नहीं है,
हसरत को निगाहों से,
गिरा क्यु नहीं देते.