तमाम एतिहात हम से किये गये,
फिर भी दोस्त अपने राह चले गये.
हमने दी सदा-ओ-सदाए हर बार,
फिर भी क्यों कर तनहा छोड़ गये.
पहले कभी ना यु तोहफा दिया,
फिर वो इक शाम रुसवा कर गये.
और दुनिया में कितनी जिलत उठाये,
उन्हें बताये 'पाशा' जहान से गुज़र गये.