पाशा की कलम से ...........
कोई तुम से पूछे, कोन हूँ में?
तुम कह देना, कोई ख़ास नहीं,
इक दोस्त है, कच्चा पक्का सा,
इक झुट है, आधा सच्चा सा,
जज़बात को छिपाए इक परदा,
बस इक बहाना अच्छा सा,
जीवन का ऐसा साथी है,
जो दूर न हो के पास नहीं,
"पाशा" कोई खास नहीं?