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Saturday, April 3, 2010

अनकही बातें

चाँद से फूल से या मेरी जुबान से सुनिये,
हर तरफ आपका किस्सा जहाँ से सुनिये.

आपको आता है मुझको सताकर जीना,
ज़िन्दगी क्या ? मुहब्बत की दुवाँ से सुनिये.

मेरी आवाज़ परदा है मेरे चहरे का,
मैं हूँ खामोश जहां मुझको वहाँ से सुनिये.

क्या जरूरी है की हर परदा उठाया जाए ?
मेरे पाशा ऐ हालात अपने दिल से सुनिये.

5 comments:

  1. BHAISAHAB BAHOT BADHIYA HAI MOHAN KO AUR MUZE BAHOT PASAND AYE HAI

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  2. kya baat hai manpasad baat hai

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  3. unkahi baaten kahi huue zubaan se

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  4. dil ko chuuti hai

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  5. ओम प्रभाकर भारतीJuly 1, 2010 at 11:47 PM

    बहुत खूब पाशा भाई
    कुछ पंक्तिय असल में ऐसे हैं
    " सबको आता नहीं दुनिया को सजाकर जीना
    जिंदगी क्या है मोहब्बत की जुबान से सुनिए "

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