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Thursday, March 18, 2010

chaahat, durrii

कुछ ना किसी से बोलेंगे,
तन्हाई में रो लेंगे,

हम बेराह बारों का क्या?
साथ किसी के हो लेंगे.

खुद तो हुए रुसवा लेकीन,
तेरे भेद ना खोलेंगे.

जीवन जहर भरा सागर,
कब तक अमृत घोलेंगे.

नींद तो क्या आएगी "पाशा"
मौत आई तो सो लेंगे.

2 comments:

  1. duuri title not fit its call bewafaai or tarsaanaa

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  2. pranab, kolkottaApril 5, 2010 at 3:08 PM

    badiyaa hai

    ReplyDelete