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Friday, March 19, 2010

mushkilen

खाली वक़्त ने, दिमाग उलझा दिया,
हर वक़्त सोचु, कुछ हो कुछ हो,
इसी कुछ-कुछ ने, दिल को उलझा दिया.

दिन भर ख्यालों का मेला रहा,
कुछ अच्छा कुछ बुरा ही बुरा रहा,
इसी बुरे ने, गैर को पास कर दिया.

दिन में है, यह आलम,
रात में ना जाने क्या हो, "पाशा"
इसी ख़याल ने, रात को उलझा दिया.

दिन का सुकून, रात की नींदे,
यु ही खराब होती नज़र आती है,
इसी मुश्किलों ने, जीना दुशवार कर दिया.

हाय हाय ये बैचैनी, हाय हाय ये दुशवारी,
किस का है ये ख़याल-ए-इल्म,
इसी से 'पाशा' ए जीवन उलझा दिया.

3 comments:

  1. suvarna gosh, culcuttaMarch 20, 2010 at 5:29 PM

    dimaag kaa sahi describe kiya hai baap, chhoti chije bhi badi hoti hai.
    may god bless you

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  2. suvarna gosh, culcuttaMarch 20, 2010 at 5:30 PM

    badhiya kah sakti huu

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  3. deepak kumar jain raachiMarch 20, 2010 at 5:32 PM

    muskil hindi urdu mix lagatii hai per dil ko chutii hai

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